Aakrosh
Ajgar
Akdu Ji - Jhagdu Ji
Amar-Akbar
Amar-Rahim-Tingu
Anguthelal
Baby
Bunty
Chacha Paropkari Lal
Chatur Chaudhary
Chatur Chaudhary
Commando
Computer Singh
Crookbond
Deepu-Jeepu
Gangaram Patel aur Bulakhi Nai
Gangaram Talli
Hawaldar Bahadur
Hawaldar Gaindaram
Hawaldar Gaindaram
Hum Char
Indra
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Jallad
Jasoon Patang
Jasoos Garmchand
Jasoos Garmchand
Jasoos X
Jataayu
Jitendra
Kaan
Kalapret
Kallu-Kauwa
Kanga
Kanga
Karnan Karna
Lalu-Kaalu
Machini Lal - Afeemi Lal
Mahabali Bheem
Mahabali Shera
Mahanayak Kids
Makdirani
Manku-Jhanku
Mohan-Sohan
Murkhraj Mandus
Ram-Rahim
Saagar-Salim
Secret Agent Sulemaan
Shaark
Sherbaaz
Shreeman Funty
Sikander
Super-Thief Rustam
Tinni
Toofan
Topchand Bandukdas
Totan
Trikaal
Trikaldev
Triple T
Uncle Charlie
Vidhwans
Vinaash
Vinod-Hamid
Yugandhar
Saturday, August 14, 2010
Saturday, July 17, 2010
Comics Fan Magazine
Comics Stolon is a magazine created by home publication 'Psycho Publishers' based on India's one of the most selling comics industry, "Home to Indian Superheroes", Raj Comics. The magazine combines character analysis, art works from fans, stories, jokes on super heroes, poems and every fun filled content you can probably think of.
All these works have been assembled to be brought to you through Comics Stolon. A new magazine era will begin shortly.
You can download the magazine from this mediafire link
Download From Here
More information please visit following blog
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Wednesday, June 30, 2010
विषांक का सम्मोहन
खाली दिमाग शैतान का घर. अपने विषांक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. उसके मन में शैतानियत जाग उठी. किसी को सम्मोहित करनी इच्छा से इधर उधर देख ही रहा था, कोई चूहा बिल्ली भी दिखाई नहीं दिया. वेदाचार्य के तिलिस्मी किले में कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता.
सिल्लू...हाँ ये सही रहेगा, मन में निश्चय करके सिल्लू को फ़ोन करके विषांक ने उसे ही बुला लिया.
सिल्लू, विषांक का परमभक्त अबिलम्ब हाज़िर हुआ.
विषांक : सिल्लू आज में तुझे सम्मोहित करूँगा, तू आज मुझसे सिर्फ सच बोलेगा.
सिल्लू: नहीं. मुझे छोड़ दो.(मैंने कल विषांक का चॉकलेट निकाल लिया था, कहीं येही न पूछ ले).
लेकिन विषांक, सिल्लू से permission नहीं ले रहा था, वो सिर्फ उसको बता रहा था की वो सिल्लू को सम्मोहित करने जा रहा है.
और आनन फानन में सिल्लू सम्मोहित हो चूका था.
विषांक: सिल्लू ये बता ये राज अंकल कौन है.
सिल्लू: नागराज.
हैं..इसको कैसे पता.
सिल्लू अपनी बात जारी रखते हुए....और भारती आंटी ध्रुव है.
विषांक आसमान से गिरा, ये राज़ तो उसको भी नहीं पता. सिल्लू तो विषांक से ज्यादा जानता है.
विषांक: तुझे कैसे मालूम .
सिल्लू: ये तो कोई बच्चा भी बता सकता है. देखा नहीं, दोनों का हेयर स्टाइल same है.
विषांक ने अपना सर पिट लिया और आगे से किसीको सम्मोहित न करने की कसम खा ली.
सिल्लू...हाँ ये सही रहेगा, मन में निश्चय करके सिल्लू को फ़ोन करके विषांक ने उसे ही बुला लिया.
सिल्लू, विषांक का परमभक्त अबिलम्ब हाज़िर हुआ.
विषांक : सिल्लू आज में तुझे सम्मोहित करूँगा, तू आज मुझसे सिर्फ सच बोलेगा.
सिल्लू: नहीं. मुझे छोड़ दो.(मैंने कल विषांक का चॉकलेट निकाल लिया था, कहीं येही न पूछ ले).
लेकिन विषांक, सिल्लू से permission नहीं ले रहा था, वो सिर्फ उसको बता रहा था की वो सिल्लू को सम्मोहित करने जा रहा है.
और आनन फानन में सिल्लू सम्मोहित हो चूका था.
विषांक: सिल्लू ये बता ये राज अंकल कौन है.
सिल्लू: नागराज.
हैं..इसको कैसे पता.
सिल्लू अपनी बात जारी रखते हुए....और भारती आंटी ध्रुव है.
विषांक आसमान से गिरा, ये राज़ तो उसको भी नहीं पता. सिल्लू तो विषांक से ज्यादा जानता है.
विषांक: तुझे कैसे मालूम .
सिल्लू: ये तो कोई बच्चा भी बता सकता है. देखा नहीं, दोनों का हेयर स्टाइल same है.
विषांक ने अपना सर पिट लिया और आगे से किसीको सम्मोहित न करने की कसम खा ली.
Monday, June 28, 2010
Sunday, May 2, 2010
PC Game on Parmanu by Raj Comics
Hello friends.
Raj Comics has provided a PC game on Parmanu.
Please visit the following link, download it and play.
This is nice game, I have played it, it is very nice.
Click here to go to download page
Sunday, March 21, 2010
Short story on Bankelal. written by me
Line-1) राजा विक्रमसिंह को मारने में अपनी असफलता को देखते हुए बांकेलाल प्लान में थोडा change करता है, और राजा को गद्दी से उतारकर खुद राजा बनने की सोचता है.
Line-2) बांकेलाल राज्य में वोट करवाने की सोचता है, वोट का पता उसे कलियुग की यात्रा में चला था, वो इसके लिए राजा को भी मना लेता है.
Line-3) राजा (यहाँ प्रधानमंत्री) बनने के लिए 2 प्रत्याशी होता है, बांकेलाल और सेनापति मरखप सिंह, मरखप सिंह बांकेलाल की चाल है, क्यूंकि वो बांकेलाल के सामने टिक नहीं पायेगा.
Line-4) विक्रमसिंह भी अपने प्रिय बांकेलाल के लिए प्रचार करता है और बांकेलाल को वोट देने की अपील करता है, लेकिन मरखप सिंह अपने लिए कोई प्रचार नहीं करता.
Line-5) वोट हो जाता है, अतिआत्म्विश्वास से भरपूर बांकेलाल वोट डालने भी नहीं जाता है, और राजा बनने की तैयारी शुरू कर देता है.
Line-6) वोट की निर्णय में मरखप सिंह विजयी होता है, बांकेलाल जब गहरी छानबीन करता है तो पता चलता है की मरखप सिंह ने अपना चुनाव चिह्न बांकेलाल का थोबडा ही रखा हुआ था.
Line-7) वोटिंग प्रक्रिया से अपिरिचित जनता बांकेलाल के थोबडे पर भरपूर मुहर लगाकर चली जाती है.
Line-8) कत्ल-ए-आम राक्षस जो सिर्फ राजाओं को मारता है, विशालगढ पर आक्रमण करता है.
Line-9) आक्रमण करते ही वो मर जाता है, क्यूंकि उसे ऋषि प्रजातान्त्रचार्य का श्राप होता है की किसी प्रजातान्त्रिक राज्य पर आक्रमण करते ही उसकी मृत्यु हो जायेगी.
Line-10) इसतरह बच जाती है विक्रमसिंह की जान और बांकेलाल को मिलती है मोटे मुच्छड़ की पुच्ची.
Line-2) बांकेलाल राज्य में वोट करवाने की सोचता है, वोट का पता उसे कलियुग की यात्रा में चला था, वो इसके लिए राजा को भी मना लेता है.
Line-3) राजा (यहाँ प्रधानमंत्री) बनने के लिए 2 प्रत्याशी होता है, बांकेलाल और सेनापति मरखप सिंह, मरखप सिंह बांकेलाल की चाल है, क्यूंकि वो बांकेलाल के सामने टिक नहीं पायेगा.
Line-4) विक्रमसिंह भी अपने प्रिय बांकेलाल के लिए प्रचार करता है और बांकेलाल को वोट देने की अपील करता है, लेकिन मरखप सिंह अपने लिए कोई प्रचार नहीं करता.
Line-5) वोट हो जाता है, अतिआत्म्विश्वास से भरपूर बांकेलाल वोट डालने भी नहीं जाता है, और राजा बनने की तैयारी शुरू कर देता है.
Line-6) वोट की निर्णय में मरखप सिंह विजयी होता है, बांकेलाल जब गहरी छानबीन करता है तो पता चलता है की मरखप सिंह ने अपना चुनाव चिह्न बांकेलाल का थोबडा ही रखा हुआ था.
Line-7) वोटिंग प्रक्रिया से अपिरिचित जनता बांकेलाल के थोबडे पर भरपूर मुहर लगाकर चली जाती है.
Line-8) कत्ल-ए-आम राक्षस जो सिर्फ राजाओं को मारता है, विशालगढ पर आक्रमण करता है.
Line-9) आक्रमण करते ही वो मर जाता है, क्यूंकि उसे ऋषि प्रजातान्त्रचार्य का श्राप होता है की किसी प्रजातान्त्रिक राज्य पर आक्रमण करते ही उसकी मृत्यु हो जायेगी.
Line-10) इसतरह बच जाती है विक्रमसिंह की जान और बांकेलाल को मिलती है मोटे मुच्छड़ की पुच्ची.
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