Comics Stolon is a magazine created by home publication 'Psycho Publishers' based on India's one of the most selling comics industry, "Home to Indian Superheroes", Raj Comics. The magazine combines character analysis, art works from fans, stories, jokes on super heroes, poems and every fun filled content you can probably think of.
All these works have been assembled to be brought to you through Comics Stolon. A new magazine era will begin shortly.
You can download the magazine from this mediafire link
Download From Here
More information please visit following blog
Visit here for detail
Saturday, July 17, 2010
Wednesday, June 30, 2010
विषांक का सम्मोहन
खाली दिमाग शैतान का घर. अपने विषांक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. उसके मन में शैतानियत जाग उठी. किसी को सम्मोहित करनी इच्छा से इधर उधर देख ही रहा था, कोई चूहा बिल्ली भी दिखाई नहीं दिया. वेदाचार्य के तिलिस्मी किले में कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता.
सिल्लू...हाँ ये सही रहेगा, मन में निश्चय करके सिल्लू को फ़ोन करके विषांक ने उसे ही बुला लिया.
सिल्लू, विषांक का परमभक्त अबिलम्ब हाज़िर हुआ.
विषांक : सिल्लू आज में तुझे सम्मोहित करूँगा, तू आज मुझसे सिर्फ सच बोलेगा.
सिल्लू: नहीं. मुझे छोड़ दो.(मैंने कल विषांक का चॉकलेट निकाल लिया था, कहीं येही न पूछ ले).
लेकिन विषांक, सिल्लू से permission नहीं ले रहा था, वो सिर्फ उसको बता रहा था की वो सिल्लू को सम्मोहित करने जा रहा है.
और आनन फानन में सिल्लू सम्मोहित हो चूका था.
विषांक: सिल्लू ये बता ये राज अंकल कौन है.
सिल्लू: नागराज.
हैं..इसको कैसे पता.
सिल्लू अपनी बात जारी रखते हुए....और भारती आंटी ध्रुव है.
विषांक आसमान से गिरा, ये राज़ तो उसको भी नहीं पता. सिल्लू तो विषांक से ज्यादा जानता है.
विषांक: तुझे कैसे मालूम .
सिल्लू: ये तो कोई बच्चा भी बता सकता है. देखा नहीं, दोनों का हेयर स्टाइल same है.
विषांक ने अपना सर पिट लिया और आगे से किसीको सम्मोहित न करने की कसम खा ली.
सिल्लू...हाँ ये सही रहेगा, मन में निश्चय करके सिल्लू को फ़ोन करके विषांक ने उसे ही बुला लिया.
सिल्लू, विषांक का परमभक्त अबिलम्ब हाज़िर हुआ.
विषांक : सिल्लू आज में तुझे सम्मोहित करूँगा, तू आज मुझसे सिर्फ सच बोलेगा.
सिल्लू: नहीं. मुझे छोड़ दो.(मैंने कल विषांक का चॉकलेट निकाल लिया था, कहीं येही न पूछ ले).
लेकिन विषांक, सिल्लू से permission नहीं ले रहा था, वो सिर्फ उसको बता रहा था की वो सिल्लू को सम्मोहित करने जा रहा है.
और आनन फानन में सिल्लू सम्मोहित हो चूका था.
विषांक: सिल्लू ये बता ये राज अंकल कौन है.
सिल्लू: नागराज.
हैं..इसको कैसे पता.
सिल्लू अपनी बात जारी रखते हुए....और भारती आंटी ध्रुव है.
विषांक आसमान से गिरा, ये राज़ तो उसको भी नहीं पता. सिल्लू तो विषांक से ज्यादा जानता है.
विषांक: तुझे कैसे मालूम .
सिल्लू: ये तो कोई बच्चा भी बता सकता है. देखा नहीं, दोनों का हेयर स्टाइल same है.
विषांक ने अपना सर पिट लिया और आगे से किसीको सम्मोहित न करने की कसम खा ली.
Monday, June 28, 2010
Sunday, May 2, 2010
PC Game on Parmanu by Raj Comics
Hello friends.
Raj Comics has provided a PC game on Parmanu.
Please visit the following link, download it and play.
This is nice game, I have played it, it is very nice.
Click here to go to download page
Sunday, March 21, 2010
Short story on Bankelal. written by me
Line-1) राजा विक्रमसिंह को मारने में अपनी असफलता को देखते हुए बांकेलाल प्लान में थोडा change करता है, और राजा को गद्दी से उतारकर खुद राजा बनने की सोचता है.
Line-2) बांकेलाल राज्य में वोट करवाने की सोचता है, वोट का पता उसे कलियुग की यात्रा में चला था, वो इसके लिए राजा को भी मना लेता है.
Line-3) राजा (यहाँ प्रधानमंत्री) बनने के लिए 2 प्रत्याशी होता है, बांकेलाल और सेनापति मरखप सिंह, मरखप सिंह बांकेलाल की चाल है, क्यूंकि वो बांकेलाल के सामने टिक नहीं पायेगा.
Line-4) विक्रमसिंह भी अपने प्रिय बांकेलाल के लिए प्रचार करता है और बांकेलाल को वोट देने की अपील करता है, लेकिन मरखप सिंह अपने लिए कोई प्रचार नहीं करता.
Line-5) वोट हो जाता है, अतिआत्म्विश्वास से भरपूर बांकेलाल वोट डालने भी नहीं जाता है, और राजा बनने की तैयारी शुरू कर देता है.
Line-6) वोट की निर्णय में मरखप सिंह विजयी होता है, बांकेलाल जब गहरी छानबीन करता है तो पता चलता है की मरखप सिंह ने अपना चुनाव चिह्न बांकेलाल का थोबडा ही रखा हुआ था.
Line-7) वोटिंग प्रक्रिया से अपिरिचित जनता बांकेलाल के थोबडे पर भरपूर मुहर लगाकर चली जाती है.
Line-8) कत्ल-ए-आम राक्षस जो सिर्फ राजाओं को मारता है, विशालगढ पर आक्रमण करता है.
Line-9) आक्रमण करते ही वो मर जाता है, क्यूंकि उसे ऋषि प्रजातान्त्रचार्य का श्राप होता है की किसी प्रजातान्त्रिक राज्य पर आक्रमण करते ही उसकी मृत्यु हो जायेगी.
Line-10) इसतरह बच जाती है विक्रमसिंह की जान और बांकेलाल को मिलती है मोटे मुच्छड़ की पुच्ची.
Line-2) बांकेलाल राज्य में वोट करवाने की सोचता है, वोट का पता उसे कलियुग की यात्रा में चला था, वो इसके लिए राजा को भी मना लेता है.
Line-3) राजा (यहाँ प्रधानमंत्री) बनने के लिए 2 प्रत्याशी होता है, बांकेलाल और सेनापति मरखप सिंह, मरखप सिंह बांकेलाल की चाल है, क्यूंकि वो बांकेलाल के सामने टिक नहीं पायेगा.
Line-4) विक्रमसिंह भी अपने प्रिय बांकेलाल के लिए प्रचार करता है और बांकेलाल को वोट देने की अपील करता है, लेकिन मरखप सिंह अपने लिए कोई प्रचार नहीं करता.
Line-5) वोट हो जाता है, अतिआत्म्विश्वास से भरपूर बांकेलाल वोट डालने भी नहीं जाता है, और राजा बनने की तैयारी शुरू कर देता है.
Line-6) वोट की निर्णय में मरखप सिंह विजयी होता है, बांकेलाल जब गहरी छानबीन करता है तो पता चलता है की मरखप सिंह ने अपना चुनाव चिह्न बांकेलाल का थोबडा ही रखा हुआ था.
Line-7) वोटिंग प्रक्रिया से अपिरिचित जनता बांकेलाल के थोबडे पर भरपूर मुहर लगाकर चली जाती है.
Line-8) कत्ल-ए-आम राक्षस जो सिर्फ राजाओं को मारता है, विशालगढ पर आक्रमण करता है.
Line-9) आक्रमण करते ही वो मर जाता है, क्यूंकि उसे ऋषि प्रजातान्त्रचार्य का श्राप होता है की किसी प्रजातान्त्रिक राज्य पर आक्रमण करते ही उसकी मृत्यु हो जायेगी.
Line-10) इसतरह बच जाती है विक्रमसिंह की जान और बांकेलाल को मिलती है मोटे मुच्छड़ की पुच्ची.
Monday, August 3, 2009
Tuesday, July 28, 2009
Join Nagraj Community on Orkut
All Nagraj fans, we do not have any active Nagraj community on Orkut.
Now it is a time to come all Nagraj fans at a single place and support for our great Super Hero. Here is the community.
Please join this.
http://www.orkut.co.in/Main#Community.aspx?cmm=47394056
Now it is a time to come all Nagraj fans at a single place and support for our great Super Hero. Here is the community.
Please join this.
http://www.orkut.co.in/Main#Community.aspx?cmm=47394056
Subscribe to:
Posts (Atom)
